बाबूलाल मरांडी पर हमले का आरोपी नक्सली गिरफ्तार, 11 साल से सरकारी नौकरी कर रहा था
पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के काफिले पर हमले के आरोपी नक्सली माधो मरांडी को झारखंड पुलिस ने रविवार को 15 साल बाद गिरफ्तार कर लिया। इससे पूछताछ में खुलासा हुआ है कि वह गिरिडीह जिले में 11 साल से आंगनबाड़ी में शिक्षक की नौकरी कर रहा था। पुलिस के मुताबिक, वह रोज स्कूल जाता था। इस दौरान उसने सात बार चुनावी ड्यूटी भी की। उसे मतदान अधिकारी बनाया गया था।
पुलिस ने माधो को कुबरी गांव स्थित उसके घर पर छापा मारकर गिरफ्तार किया। वह सिधवासोती विस्फोट कांड का मुख्य आरोपी है। 2003 में बाबूलाल मरांडी नक्सल प्रभावित गांव सेवाटांड़ और नारोटांड़ में जनता दरबार में शामिल होने जा रहे थे। सिधवासोती के पास घने जंगल में नक्सलियों ने लैंडमाइंस बिछा रखा था। मरांडी का काफिला तिसरी प्रखंड मुख्यालय पहुंच चुका था, जहां से 10 मिनट बाद सिधवासोती जंगल पार करता। तभी तीन विस्फोट हुए। इसमें एक हवलदार और दो ग्रामीणों की मौत हो गई थी।
माधो को 2007 में मिली थी नौकरी: नक्सली माधो गावां प्रखंड के एक स्कूल में पारा शिक्षक (गैर-नियमित) है। माधो का चयन 2007 में हुआ था। वह शिक्षक के साथ-साथ स्कूल प्रबंधन समिति का सचिव भी है। शिक्षा विभाग हर साल उसके अनुबंध का नवीनीकरण भी करता रहा। बीईईओ अनिल सिन्हा ने बताया कि माधो मरांडी को लेकर पहले भी आर्थिक अनियमितता में कई बार जांच हो चुकी है। सचिव रहते हुए उस पर स्कूल भवन निर्माण में 7 लाख रुपए गबन का भी आरोप है।
लोगों को पीछे हटने का मौका ही नहीं मिला
जब दोनों ट्रेनें जोड़ा बाजार रेल फाटक के नजदीक पहुंचीं तो रावण दहन के वीडियो बना रहे लोगों को कुछ समझने या पीछे हटने का मौका ही नहीं मिला। मरने वालों में बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। इनमें से अधिकतर उत्तरप्रदेश-बिहार के रहने वाले थे। जिस जगह रावण दहन हो रहा था, वहां काफी कम जगह होने के कारण इतने लोगों के बैठने या खड़े होने का इंतजाम नहीं था। अमृतसर के पुलिस आयुक्त एसएस श्रीवास्तव ने बताया कि हादसे में मरने वालों का आंकड़ा 70 हो गया है।
बैरिकेडिंग नहीं थी, 150 मीटर तक बिखरी लाशें
दशहरे के कार्यक्रम का आयोजन वॉर्ड नंबर 29 से महिला पार्षद विजय मदान के बेटे सौरव मदान उर्फ मिट्ठू मदान ने किया था। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम के दौरान प्रशासन ने कोई व्यवस्था नहीं की थी। रेलवे ट्रैक के आसपास बैरिकेडिंग नहीं की गई थी। ट्रेनों के आने की सूचना देने के लिए अलार्म की भी व्यवस्था नहीं थी। पटरियों से महज 200 फीट की दूरी पर पुतला जलाया जा रहा था। कार्यक्रम बिना इजाजत हो रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि हादसे के बाद घटनास्थल पर 100 से 150 मीटर के दायरे में लाशें बिखर गईं।
पुलिस ने माधो को कुबरी गांव स्थित उसके घर पर छापा मारकर गिरफ्तार किया। वह सिधवासोती विस्फोट कांड का मुख्य आरोपी है। 2003 में बाबूलाल मरांडी नक्सल प्रभावित गांव सेवाटांड़ और नारोटांड़ में जनता दरबार में शामिल होने जा रहे थे। सिधवासोती के पास घने जंगल में नक्सलियों ने लैंडमाइंस बिछा रखा था। मरांडी का काफिला तिसरी प्रखंड मुख्यालय पहुंच चुका था, जहां से 10 मिनट बाद सिधवासोती जंगल पार करता। तभी तीन विस्फोट हुए। इसमें एक हवलदार और दो ग्रामीणों की मौत हो गई थी।
माधो को 2007 में मिली थी नौकरी: नक्सली माधो गावां प्रखंड के एक स्कूल में पारा शिक्षक (गैर-नियमित) है। माधो का चयन 2007 में हुआ था। वह शिक्षक के साथ-साथ स्कूल प्रबंधन समिति का सचिव भी है। शिक्षा विभाग हर साल उसके अनुबंध का नवीनीकरण भी करता रहा। बीईईओ अनिल सिन्हा ने बताया कि माधो मरांडी को लेकर पहले भी आर्थिक अनियमितता में कई बार जांच हो चुकी है। सचिव रहते हुए उस पर स्कूल भवन निर्माण में 7 लाख रुपए गबन का भी आरोप है।
लोगों को पीछे हटने का मौका ही नहीं मिला
जब दोनों ट्रेनें जोड़ा बाजार रेल फाटक के नजदीक पहुंचीं तो रावण दहन के वीडियो बना रहे लोगों को कुछ समझने या पीछे हटने का मौका ही नहीं मिला। मरने वालों में बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। इनमें से अधिकतर उत्तरप्रदेश-बिहार के रहने वाले थे। जिस जगह रावण दहन हो रहा था, वहां काफी कम जगह होने के कारण इतने लोगों के बैठने या खड़े होने का इंतजाम नहीं था। अमृतसर के पुलिस आयुक्त एसएस श्रीवास्तव ने बताया कि हादसे में मरने वालों का आंकड़ा 70 हो गया है।
बैरिकेडिंग नहीं थी, 150 मीटर तक बिखरी लाशें
दशहरे के कार्यक्रम का आयोजन वॉर्ड नंबर 29 से महिला पार्षद विजय मदान के बेटे सौरव मदान उर्फ मिट्ठू मदान ने किया था। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम के दौरान प्रशासन ने कोई व्यवस्था नहीं की थी। रेलवे ट्रैक के आसपास बैरिकेडिंग नहीं की गई थी। ट्रेनों के आने की सूचना देने के लिए अलार्म की भी व्यवस्था नहीं थी। पटरियों से महज 200 फीट की दूरी पर पुतला जलाया जा रहा था। कार्यक्रम बिना इजाजत हो रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि हादसे के बाद घटनास्थल पर 100 से 150 मीटर के दायरे में लाशें बिखर गईं।
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